हल्का कैंपिंग गियर: सही किट कैसे चुनें
द्वारा Bivoa · 2 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट
खुले में कैंपिंग आपको यह आज़ादी देती है कि जहाँ रात हो जाए, वहीं रुक जाएँ। मुश्किल बस इतनी है कि सोने, खाने और अँधेरे में देखने के लिए जो कुछ चाहिए, वह सब आपकी पीठ पर ही चलता है। यहाँ हम एक-एक श्रेणी लेकर बताएँगे कि हल्का कैंपिंग गियर कैसे चुनें, और कोई ज़रूरी चीज़ पीछे भी न छूटे।
हल्का बैग सब कुछ क्यों बदल देता है
हर किलो जो आप कम करते हैं, उसका असर चढ़ाई पर, उतराई में घुटनों पर और पूरे सफ़र के मज़े पर साफ़ दिखता है। मक़सद सब कुछ वज़न के नाम पर क़ुर्बान करना नहीं है, बल्कि हर चीज़ को इस आधार पर चुनना है कि वह असल में कितनी काम की है।
एक काम का पैमाना है आपका बेस वेट: यानी खाने और पानी को छोड़कर बैग में रखी हर चीज़ का वज़न। पारंपरिक कैंपिंग सेटअप आसानी से 10 किलो पार कर जाता है; कुछ समझदारी भरे बदलावों से इसे 6 या 7 किलो तक लाना पूरी तरह मुमकिन है। अपने सामान को किचन स्केल पर तौलें और एक स्प्रेडशीट में लिखते जाएँ। नतीजे अक्सर आँखें खोल देने वाले होते हैं।
आश्रय और नींद: सबसे भारी श्रेणी
आपका टेंट, स्लीपिंग बैग और स्लीपिंग पैड आमतौर पर बेस वेट का लगभग आधा हिस्सा होते हैं। आपके पास दो मुख्य विकल्प हैं:
- टेंट: हवा और बारिश से पूरी सुरक्षा, और ट्री लाइन के ऊपर तो ज़रूरी ही है।
- हैमॉक: जंगल में बढ़िया, यह आपको पथरीली या ढलान वाली ज़मीन की चिंता से आज़ाद कर देता है। हमारा अल्ट्रालाइट हैमॉक स्ट्रैप समेत 500 ग्राम का है और एक किलो से कहीं ज़्यादा भारी टेंट की जगह ले सकता है, बशर्ते बारिश के लिए आप साथ में एक टार्प रखें।
आप जो भी चुनें, नीचे की इंसुलेशन को नज़रअंदाज़ न करें। 6 सेमी का इन्फ्लेटेबल स्लीपिंग पैड ज़मीन की ठंड को रोकता है, और हैमॉक में भी पीठ में ठंड लगने का एहसास नहीं होने देता। साथ में 80 ग्राम का हवा भरने वाला तकिया जोड़ें: वज़न के हिसाब से आराम देने में शायद यह आपके पूरे बैग की सबसे बढ़िया चीज़ है।
खाना पकाना: सादा और कॉम्पैक्ट रखें
बर्तनों का पूरा सेट ढोने की कोई ज़रूरत नहीं। एक कॉम्पैक्ट गैस स्टोव और 750 मिली का पॉट, एक रेडी-टू-ईट खाने, एक कप चाय और एक सूप के लिए पानी उबालने को काफ़ी है। टाइटेनियम पॉट वाला हमारा ट्रेकिंग स्टोव 180 ग्राम का है और बर्नर पॉट के अंदर ही रखा जाता है, यानी बैग से निकालने के लिए सिर्फ़ एक चीज़।
ख़रीदने से पहले तीन बातें जाँच लें:
- क्या यह उन कैनिस्टर के साथ चलता है जो आपको आसपास सच में मिल जाते हैं (EN417 थ्रेडेड वाल्व सबसे आम हैं);
- पीज़ो इग्निशन है या नहीं, और किट में एक बैकअप लाइटर ज़रूर रखें;
- भरे हुए पॉट के साथ पॉट सपोर्ट कितने स्थिर रहते हैं।
पानी: कम ढोएँ, ज़्यादा फ़िल्टर करें
पानी भारी होता है: एक लीटर का वज़न एक किलो। तीन लीटर लेकर निकलने के बजाय, नक्शे पर धाराओं और झरनों को चिह्नित करें और एक वॉटर फ़िल्टर स्ट्रॉ साथ रखें। यह मीठे पानी में मौजूद बैक्टीरिया और प्रोटोज़ोआ को रोक लेता है, लेकिन वायरस या केमिकल प्रदूषण पर काम नहीं करता, इसलिए रुके हुए पानी और मवेशियों के चरने की जगह से नीचे बहने वाले पानी से बचें, और शक होने पर पानी उबाल लें।
रोशनी: एक से भले दो
अँधेरे में चलने या खाना बनाने के लिए हेडलैंप ज़रूरी है। इसके साथ एक फ़ोल्डेबल सोलर लालटेन रखें: दिन में बैग पर टँगी रहकर यह बिना किसी तार के चार्ज होती है और शाम को पूरे कैंप को रोशन कर देती है। इन दोनों के रहते आप एक्स्ट्रा बैटरी घर पर ही छोड़ सकते हैं।
सामान ढोना: सबसे ज़रूरी चीज़ों को बचाएँ
पानी से बचाने वाला रकसैक भी आख़िरकार नमी अंदर आने ही देता है। अपना स्लीपिंग बैग और एक्स्ट्रा कपड़े ड्राई बैग में पैक करें, तो दिन भर की तेज़ बौछारों के बाद भी सूखी रात पक्की है।
हमारी झटपट किट लिस्ट
- आश्रय: हल्का टेंट, या हैमॉक और टार्प
- नींद: मौसम के हिसाब से स्लीपिंग बैग, इन्फ्लेटेबल स्लीपिंग पैड, तकिया
- किचन: स्टोव, पॉट, गैस कैनिस्टर, स्पॉर्क, लाइटर
- पानी: फ़ोल्ड होने वाली बोतलें, वॉटर फ़िल्टर स्ट्रॉ
- रोशनी: हेडलैंप और सोलर लालटेन
- बाक़ी: ड्राई बैग, फ़र्स्ट एड किट, चाकू, कचरे का थैला
निकलने से पहले स्थानीय नियम ज़रूर जाँच लें। भारत में ज़्यादातर नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्यों और रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में कैंपिंग के लिए वन विभाग की अनुमति लेनी पड़ती है, कई हिमालयी ट्रेक पर परमिट और रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, और सूखे मौसम में आग जलाने पर रोक लग सकती है। हल्का सामान लेकर चलें, पूरी जानकारी रखें और तारों भरी रात का आनंद लें।